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उत्तराखंड की राजनीति में वर्षों से चली आ रही “अंतिम साल में नेतृत्व बदलाव” की परंपरा को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निर्णायक रूप से तोड़ दिया है। जहां हर मार्च में बदलाव की अटकलें तेज होती थीं, वहीं अब स्थिरता और प्रदर्शन ने जगह बना ली है।

पहले मुख्यमंत्री को रिपीट कर भाजपा ने साफ संदेश दिया था, और अब पांचवें वर्ष में मंत्रिमंडल विस्तार कर यह भी स्पष्ट कर दिया कि सरकार बदलाव नहीं, काम के आधार पर आगे बढ़ रही है।

राम सिंह कैड़ा, खजान दास, प्रदीप बत्रा, भरत सिंह चौधरी और मदन कौशिक जैसे अनुभवी चेहरों की एंट्री ने क्षेत्रीय संतुलन और संगठन दोनों को मजबूती दी है। यह केवल कैबिनेट विस्तार नहीं, बल्कि धामी नेतृत्व पर बढ़ते भरोसे का संकेत है। केंद्र से लेकर संगठन तक मिला समर्थन उनकी मजबूत पकड़ को दिखाता है।

धामी ने साबित कर दिया कि वे परिस्थितियों के साथ बहने वाले नहीं, बल्कि उन्हें अपने पक्ष में मोड़ने वाले नेता हैं। अब तस्वीर साफ है—उत्तराखंड की राजनीति में परंपरा नहीं, प्रदर्शन चलेगा…और इस नए दौर के केंद्र में हैं—पुष्कर सिंह धामी।
Pushkar Singh Dhami

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